मेरा रंग दे बसंती चोला माए रंग दे

पारंपरिक
अन्य भजन देश भक्ति भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मेरा रंग दे...

मेरा रंग दे बसंती चोला माए रंग दे,

मेरा रंग दे बसंती चोला माए रंग दे |

निकले हैं वीर जिया ले यूं अपना सीना ताने,

है है के जान लुटाने,आज़ाद सवेरा लाने |

मर के कैसे जीते हैं,इस दुनिया को बतलाने,

तेरे लाल चले हैं माए,अब तेरी लाज बचाने |

आज़ादी का शोला बन के खून रगों में डोला,

मेरा रंग दे…

मेरा रंग दे बसंती चोला माये रंग दे

मेरा रंग दे बसंती चोला माये रंग दे |

दिन आज तो बड़ा सुहाना

मौसम भी बड़ा सुनहरा

हम सर पे बाँध के आये

बलिदानों का ये सेहरा

बेताब हमारे दिल में इक मस्ती सी छायी है

ऐ देश अलविदा तुझको कहने की घडी आई है

महकेंगे तेरी फिज़ा में हम बन के हवा का झोंका

किस्मत वालों को मिलता ऐसे मरने का मौका

निकली है बरात सजा है इंक़लाब का डोला

मेरा रंग दे…

मेरा रंग दे बसंती चोला माये रंग दे

मेरा रंग दे बसंती चोला माये रंग दे

मेरा रंग दे बसंती चोला रंग दे, रंग दे..

रंग दे बसंती चोला माये रंग दे..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।