तेरा शुकरियाँ जो तूने ये जिंगदी दी

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॥ पावन पाठ ॥

तेरा शुकरियाँ जो तूने ये जिंगदी दी,

तेरा शुकरियाँ जो तूने हमे हर ख़ुशी दी,

तेरा शुकरियाँ जो तूने ये जिंगदी दी,

तेरा नाम ले कर गुजरे दिन और राते,

होठो पे हर लम्हा हो साई तेरी बाते,

अपनी रेहमतो की किसी पे तूने न कमी की,

तेरा शुकरियाँ जो तूने ये जिंगदी दी,

तू ही सबका रखवाला है तू ही सब का दाता,

सब को तेरी चाहत साई सब का तुझसे नाता,

बिन मांगे तूने साई हमे हर ख़ुशी दी,

तेरा शुकरियाँ जो तूने ये जिंगदी दी,

तेरा हो इशारा तो मैं सब कुछ लुटा दू,

दिल क्या है जा भी साई तुझपे मिटा दू,

तेरे सामने कीमत क्या इस जिंदगी की,

तेरा शुकरियाँ जो तूने ये जिंगदी दी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।