डेरा सतगुरु प्यारे दा

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

विच नारी दे डेरा सतगुरु प्यारे दा,

रूप साहा ना जावे धुनें वाले दा,

योगी सेवक बाल ब्रह्म चारी,

जिथे झुक्दी दुनिया सारी,

भगत दूर दूर तो आउंदे इथे नाम दी शिक्षा पाउंदे,

जगत सहारे दा,रूप साहा ना जावे धुनें वाले दा,

दरबार ते धुना जगता भगता नु प्यारा लगदा,

बाबा रुदुरु दी शान निराली मुड़े एहथो न कोई खाली

आखा दे तारे दा रूप साहा ना जावे धुनें वाले दा,

पंज पिपला दी लीला न्यारी हुंडी तन दी दूर बीमारी,

लवली भी दर ते आया तनु गुरा ने पार लंगाया,

कष्ट निवारे दा रूप साहा ना जावे धुनें वाले दा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।