सर पे हिमालय का छत्र है चरणों में नदियाँ एकत्र है

भारत व्यास
श्री राम भजन देश भक्ति भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

जय भारती ! वन्दे भारती !

सर पे हिमालय का छत्र है,

चरणों में नदियाँ एकत्र हैं,

हाथों में वेदों के पत्र हैं,

देश नहीं ऐसा अन्यत्र है |

जय भारती ! वन्दे भारती !

जय भारती ! वन्दे भारती !

धुंए से पावन ये व्योम है,

घर घर में होता जहाँ होम है,

पुलकित हमारे रोम रोम है,

आदि-अनादि शब्द ॐ है |

जय भारती! वन्दे भारती!

वन्दे मातरम ! वन्दे मातरम !

जिस भूमि पे जन्म लिया राम ने,

गीता सुनायी जहाँ श्याम ने ,

पावन बनाया चारो धाम ने,

स्वर्ग भी ना आये जिसके सामने |

जय भारती!वन्दे भारती!

वन्दे मातरम ! वन्दे मातरम !

स्वर - लता मंगेशकर

फिल्म - जगदगुरु संकराचार्य (1955)

गीतकार - भारत व्यास

संगीत संयोजन - अविनाश व्यास

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।