ये मालकिन है मेरे घर की

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॥ पावन पाठ ॥

मुझे फ़िक्र नहीं इस के रहते ये मालकिन है मेरे घर की,

ये मालकिन है मेरे घर की ये मालकिन है मेरे घर की ,

मुझे फ़िक्र नहीं इस के रहते ...

पल पल की खबर ये लेती है यो मांगो हस के देती है,

अब न कोई दुखड़े सहते ये मालकिन है मेरे घर की ,

मुझे फ़िक्र नहीं इस के रहते ...

कैसे होगा और कब होगा ये कुछ इन पे छोड़ा है,

जो दिल में है इसको कहते ये मालकिन है मेरे घर की ,

मुझे फ़िक्र नहीं इस के रहते ...

मेरी हर उल्जन सुलझाती योगी ये मुझे राह दिखाती ये,

बड़े फकर से हम अब ये कहते ये मालकिन है मेरे घर की ,

मुझे फ़िक्र नहीं इस के रहते ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।