जय कारा बोलो प्यार से दोबरा बोलो प्यार से

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय कारा बोलो प्यार से दोबरा बोलो प्यार से,

दुनिया की खुशियां मिलती है वाणी के दरबार से.,

जय कारा बोलो प्यार से दोबरा बोलो प्यार से,

चन्दन की चौंकी पे बैठी जगदम्बे महारानी,

दो नैनं में चाँद सूरज मुखड़ा है नूरानी,

पल में मैया बदले किस्मत सुन कर के जय कार से,

जय कारा बोलो प्यार से दोबरा बोलो प्यार से,

लाल लाल है तन पे चोला गल पुष्पों की माला

जो भी माँ के रूप को देखे हो जाए मतवाला,

उस को सब कुछ मिल जाता है मैया के भण्डार से,

जय कारा बोलो प्यार से दोबरा बोलो प्यार से,

कोई न इसको देख सके पर वो सब को ही देखे,

पर देखे पीछे वो बैठी लिखती सब के लेखे,

श्याम ने कुछ पाया भगतो मैया के उपकार से,

जय कारा बोलो प्यार से दोबरा बोलो प्यार से,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।