बिन बोले मेरी मैया सब जान जाती है

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॥ पावन पाठ ॥

बिन बोले मेरी मैया सब जान जाती है,

मेरा संकट हरने को मैया दौड़ी आती है,

बिन बोले मेरी मैया सब जान जाती है

ये दूर नहीं हमसे बस याद करो मन से,

जिस ने तेरा नाम लिया वो पार हुआ तब से,

मेरी किस्मत का ताला माँ खोल जाती है,

मेरा संकट हरने को मैया दौड़ी आती है,

बिन बोले मेरी मैया सब जान जाती है

अब तेरे सिवा मुझको कोई चाह नहीं है माँ,

दुनिया की अब मुझको परवाह नहीं है माँ,

मेरी डूभ न जाए नैया माँ नाव चलाती है

मेरा संकट हरने को मैया दौड़ी आती है,

बिन बोले मेरी मैया सब जान जाती है

अब भूल मेरी मैया तुझे छोड़ कहा जाऊ,

चरणों में सेवा देदे तेरी सेवा में लग जाऊ,

मुझपर अपनी ममता हर बार लुटाती है,

मेरा संकट हरने को मैया दौड़ी आती है,

बिन बोले मेरी मैया सब जान जाती है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।