इन्साफ की डगर पे बच्चो दिखाओ चल के

शकील बदायुनी
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॥ पावन पाठ ॥

इन्साफ की डगर पे, बच्चों दिखाओ चल के

ये देश है तुम्हारा, नेता तुम्हीं हो कल के

दुनिया के रंज सहना और कुछ ना मुँह से कहना

सच्चाईयों के बल पे, आगे को बढ़ते रहना

रख दोगे एक दिन तुम, संसार को बदल के

इन्साफ की डगर पे...

अपने हों या पराए, सब के लिए हो न्याय

देखो कदम तुम्हारा, हरगिज़ ना डगमगाए

रस्ते बड़े कठिन हैं, चलना संभल-संभल के

इन्साफ की डगर पे...

इन्सानियत के सर पे, इज़्ज़त का ताज रखना

तन मन की भेंट देकर, भारत की लाज रखना

जीवन नया मिलेगा, अंतिम चिता में जल के

इन्साफ की डगर पे...

गायक - हेमंत कुमार

गीतकार - शकील बदायुनी

संगीत - नौशाद

फिल्म - गंगा जमुना (1961)

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।