फूलो से राज रानी का झूला सजा दियां

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॥ पावन पाठ ॥

फूलो से राज रानी का झूला सजा दियां,

आ जा ना मेरी दादी माँ उत्सव जो आ गया,

फूलो से राज रानी का झूला सजा दियां,

नथनी पाएनाउंगी तुझे चुनड़ी उडाऊगी,

छम छम बजी जो पाइयले मन को लुभा गया,

आ जा ना मेरी दादी माँ उत्सव जो आ गया,

फूलो से राज रानी का झूला सजा दियां,

चूड़ा पहनाऊगी तुझे मेहँदी लगाऊ गी,

मेहँदी रची जो हाथ में जादू सा छा गया,

आ जा ना मेरी दादी माँ उत्सव जो आ गया,

फूलो से राज रानी का झूला सजा दियां,

सजधज के देखो आ गई कर सोलह शृंगार,

सूरज सा तेज दादी के मुखड़े पे छा गया

आ जा ना मेरी दादी माँ उत्सव जो आ गया,

फूलो से राज रानी का झूला सजा दियां,

झूले पे बैठो दादी जी झूला झुलाउ गी,

ममता भरा हाथ तूने जो सिर पे फिर दिया,

आ जा ना मेरी दादी माँ उत्सव जो आ गया,

फूलो से राज रानी का झूला सजा दियां,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।