मेरे जोगी जी दा द्वारा मैं मंदिरा चो आई हो जाना

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॥ पावन पाठ ॥

मेरे जोगी जी दा द्वारा मैं मंदिरा चो आई हो जाना,

सोहनी झोली वे जोगिये दी रेशम दी बनिये,

विच बुम्बल ले कदे सेवादार मैं मंदिरा चो आई हो जाना

सोहना चिमटा वे जोगिये दा लोहे दा बनीया,

विच धुनें ले कदे सेवादार मैं मंदिरा चो आई हो जाना

सोहने मुंद्रा वे जोगिये दी कच दी बनी ऐ,

विच कनि पवा दे सेवादार मैं मंदिरा चो आई हो जाना

सोहनी सिंगी वे जोगिये दी चांदी दी बनिये,

विच गले पवा दे सेवादार मैं मंदिरा चो आई हो जाना

तेरे पिंकू बचे ने तेरे मंदिर आउना,

नाले प्रिय नु भुला ले सेवादार मैं मंदिरा चो आई हो जाना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।