मेरे कान्हा कृष्ण मुरारी सुन लो इतनी अर्ज हमारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे कान्हा कृष्ण मुरारी सुन लो इतनी अर्ज हमारी करदो पार जी,

खड़े तेरे दवार जी,

सच्ची श्रद्धा भाव से जो भी तेरी शरण में आये,

हारे का तेरा नाम सहारा सब को गले लगाए,

वो तो मर के भी ना मरता यो है तेरे नाम से करता सच्चा प्यार जी खड़े तेरे द्वार जी,

मेरे कान्हा कृष्ण मुरारी सुन लो इतनी अर्ज हमारी करदो पार जी,

खड़े तेरे दवार जी,

मैंने तो बस मोहन तुम को आपने मान लिया है,

करदी तूने मुझपे किरपा ये एहसान कियाँ है

भगति की ये लगन लगा दी मेरे मन में ज्योत जगा दी मिटा अन्धकार जी खड़े तेरे द्वार जी,

मेरे कान्हा कृष्ण मुरारी सुन लो इतनी अर्ज हमारी करदो पार जी,

खड़े तेरे दवार जी,

शरण तुम्हारी आन पड़ी है ये चंचल बंजारा,

फौजी सुरेश का तेरे नाम बिन होता नहीं गुजारा ,

इक वृन्दावन मथुरा जाये दूजे के मन को भये खाटू धाम जी खड़े तेरे द्वार जी,

मेरे कान्हा कृष्ण मुरारी सुन लो इतनी अर्ज हमारी करदो पार जी,

खड़े तेरे दवार जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।