म्हारो बाबो रे माहरे सागे चले है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

म्हारो बाबो रे माहरे सागे चले है माहरे आगे चिंता न कोई बात की ,

यो लीलो असवार लुटावे गहनों प्यार कमी न कोई ठाठ की,

म्हाने जग से मिलो इको दर है ईब चिंता न कोई फ़िक्र है,

मैं तो गाउ भजन मेरी लागी लगन राखे पल पल की मेरी खबर है,

मेरी आखियाँ कदे भी नहीं रोइ रे जद सु होइ मेहर दीना नाथ की,

यो लीलो असवार लुटावे गहनों प्यार कमी न कोई ठाठ की,

एनके नाम की भजावा हाजरी खावा एनकी ड्योढ़ी मैं बाजारी,

माहरो दूजा नहीं कोई काम करा मैं तो श्याम चरण की चाखरी,

म्हाने बाबो कदे न बिसरावे यो चढ़ लीले आवे राखे न कोई आट की.

यो लीलो असवार लुटावे गहनों प्यार कमी न कोई ठाठ की,

महसु सांवरियो बोले मत लावे,

माहने हर पल धीर बंदावे,

मैं जद भी डरा महसूस करा महारे सिरपे हाथ फिरावे,

एसो साथी मिले है म्हाने यो सब कुछ जाने हे मनडे ऋ बात जी,

यो लीलो असवार लुटावे गहनों प्यार कमी न कोई ठाठ की,

आ तो कलयुग की सच्ची सरकार है,

साड़ी दुनिया में होवे जैकार है,

देख्या दानी कई श्याम जीसो नहीं एह की किरपा का न पाया प्यार है,

नम्रता सु जो श्याम रिजावे जो प्रेम बढ़ावे मूरत बोले काठ की,

यो लीलो असवार लुटावे गहनों प्यार कमी न कोई ठाठ की,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।