नि मैं विच जगराते नचना भगता दी टोली नाल

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

सोहना माँ दा भवन सजा के रंग भीरंगियाँ लड़ियाँ ला के,

चारे पासे खुशियाँ दा रंग बरसे नालो नाल.

नि मैं विच जगराते नचना भगता दी टोली नाल,

गल विच चुनियाँ टिका लाके नच्दे भगत प्यारे,

स्वर्गा नालो सोहने लगदे देखो मस्त नजारे,

दिल करदा मैं वेखी जावा माँ दा रूप कमाल,

नि मैं विच जगराते नचना भगता दी टोली नाल,

ढोल खडकदा नाल झूम दी माँ भगता दी टोली,

जय जय कार जयकारे कनी पैंदी मीठी बोली,

माँ मंदिरा ते मेले सुनिया रहंदे सारा साल,

नि मैं विच जगराते नचना भगता दी टोली नाल,

आजो आजो नचिये गाइए नचिये ख़ुशी मनाइए ,

संगता दे नाल जगराते विच हाजरियां लगवाइये,

सरजीवन संग साहिब नचे वजे मीठी ताल,

नि मैं विच जगराते नचना भगता दी टोली नाल,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।