आज वंड ने खजाने महा माई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दिन आ गये ने नवरातेया दे शुरू होये चाले आ मियां दे भवन दे नजारे ही निराला आ,

चिन्तपूर्णी मिटावे हर चिंता नसीब सुते दिन्दी आ जगा,

आज वंड ने खजाने महा माई लो जी सारे झोलियाँ भरा,

बरसदी ए रेहमत मैया दे दर न्यारी आ,

तरस दी जह्नु दुनिया ए सारी है,

ओहदे ना दी जिह्ना ने खट्टी खट ली ओहना दे घर नफा ही नफा

आज वंड ने खजाने महा माई लो जी सारे झोलियाँ भरा,

अड़चन रिश्ते च जदो कोई आउंदी है धियाँ दी फिकर ता हर एक नु सताउंदी आ,

कई सूखा सुख होइया ने सोहागना भी आजो दर मेहन्दिया लगा,

आज वंड ने खजाने महा माई लो जी सारे झोलियाँ भरा,

आसा नु ही खैर जेवे नीत नु मुराद आ,

हुँदा है सवेरा जीवे नेहरिया तो बाद आ,

इको ज्योत सुख तेरे विश्वाश दी,

जो जिंदगी नु दिन्दी रुषना,

आज वंड ने खजाने महा माई लो जी सारे झोलियाँ भरा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।