साई दिया मेहरा ने

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॥ पावन पाठ ॥

साई दिया मेहरा ने,

मंगन तो पहला मिलदा किस गल दियां देरा ने,

साई दिया मेहरा ने,

साई मेरे विच वसदा ए,

हंजुआ च मेरे दिसदा मेरे हासेया ते हसदा ऐ,

कोई परदे दारी नहीं,

सैयां नाल लाइयाँ यारियां किसे होर नाल यारी नहीं,

गल गल विच चल गई है,

साई जी ने डोर फड़ ले गुड़ी अम्ब्रा दे वल गई है ,

साडी एहो कमाई ऐ,

दिल दी तिजोरी विच फोटो साई जी दी लाइ है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।