जो भी नाम मइयां दा लेंदे ओ सवाली तर जांदे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जो भी नाम मइयां दा लेंदे ओ सवाली तर जांदे,

जो भी श्रद्धा नाल ध्याउंदे ओहदे पल्ले भर जांदे,

एह है मैया जग कल्याणी चिंतपूर्णी महारानी,

चिंता सब दी माँ है हरदी संकट सारे टल जांदे,

जो भी श्रद्धा नाल ध्याउंदे ओहदे पल्ले भर जांदे,

चिंतपूर्णी नमो नमा मेरे अंग संग रहो हमेश,

वीगन हरो माँ आत भवानी काटो सभी कलेश,

चरना च आके माये सकून बड़ा मिलदा,

गमा विच डूबा दिल फुला वांगु खिल्दा,

महिमा तेरी किसे न जाने आधी शक्ति शिव पटरानी,

दर ते रोंदे जो भी आउंदे सारे हसदे तर जांदे ,

जो भी नाम मइयां दा लेंदे ओ सवाली तर जांदे,

कटियाँ गरीबियाँ ते दुःख बड़े जरे माँ,

आके तेरे चरना च झोली अड़ खड़े माँ,

खैर रेहमता दी पा दे सुट्टे भाग जगा दे,

तेरी किरपा नाल ही बन दे जो भी कम अड़ जांदे

जो भी नाम मइयां दा लेंदे ओ सवाली तर जांदे,

मथे उते मोहर तेरे नाम वाली ला दे माँ,

गुरा दा अमानत सदा तेरे गुण गावे माँ,

तेरे चरना दा प्यार मैनु रख ले सेवादार,

हो जे मेहर ता गूंगे गाउँदे पिग्ले चढ़ाइयाँ चढ़ जांदे,

जो भी नाम मइयां दा लेंदे ओ सवाली तर जांदे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।