नाथ मोहे कैसे तारो गे

पारंपरिक
श्री राम भजन गुरुदेव भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

मेरा अवगुण भरा शरीर मिला न कोई गुरु न पीर,

नाथ मोहे कैसे तारो गे प्रभु जी मोहे कैसे तारो गे,

पानी गंदला साफुन थोड़ा सारा जीवन मैला,

पंच चोर बिन लागि नगरियां कैसे मन को धीर,

मिला न कोई गुरु न पीर,

प्रभु जी मोहे कैसे तारो गे,नाथ मोहे कैसे तारो गे

नाथ मोहे कैसे तारो गे प्रभु जी मोहे कैसे तारो गे,

मैं मैं करते जन्म गवाया धर्म कर्म न जाना,

मद माया में लिपट हो मेरी राम गोदता सीर,

मिला न कोई गुरु न पीर,

नाथ मोहे कैसे तारो गे प्रभु जी मोहे कैसे तारो गे,

हाड मॉस के इस पिंजर को लीपा पोती किनी,

मन मंदिर ना पूजा कीह्नी जिहने हिरदो शरीर,

मिला न कोई गुरु न पीर,

नाथ मोहे कैसे तारो गे प्रभु जी मोहे कैसे तारो गे,

देख न खाया छान ना पिया लुटा हित पराया.

तात पराई का ताक बेगैनी का तू रिश्ता भरा शरीर,

मिला न कोई गुरु न पीर,

प्रभु जी मोहे कैसे तारो गे,नाथ मोहे कैसे तारो गे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।