फोड़ी मटकी तेरे नन्द लाल

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मटकी पे मटकी मैं दर के चली थी,

वृन्दावन की वो ही कुञ्ज गली थी,

फोड़ी मटकी तेरे नन्द लाल ने ,

पहले तो पीछे से मारे कंकारियाँ फिर तेरे कान्हा ने रोकी डगरियाँ ,

बाहे मोड़ी माँ तेरे गोपाल ने,

यहाँ यहां जाऊ मैया पीछे आये मेरे,

संग में आई कई माखन के लुटेरे,

कैसे बताऊ ए माँ तुझे रास्ता ना हो कोई मुझे सूजे,

लाल चुनरियाँ मैं ओड खड़ी थी कान्हा के संग मियां गाये बड़ी थी,

पीछे छोड़ी तेरे गोपाल ने,

गाये छोड़ी तेरे नन्द लाल ने,

कहा कहा मैया छाज माखन छुपाऊ,

तेरे लला की उत्पात कैसे मैं बताऊ,

आता है मैया आधी रात में आये न कभी भी मेरे हाथ में,

ताला और कुण्डी लगा के गई थी,

छीके पे मटकी टंगा के गई थी,

कुण्डी तोड़ी तेरे इस लाल ने,

मटकी फोड़ी यशोदा तेरे लाल ने,

झूठी है ये गुजरी तेरे भोले नन्द लाला ,

मुझको है नचाये रस्ते में ब्रिज बाला,

करता हु जो मैं इंकार माँ करती है मुझसे तकरार माँ,

हस के यशोदा ने बाहे फैलाई,

प्यारे कन्हियान को कंठ लगाई

विजय पाई यशोदा तेरे लाल ने,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।