मन मुश्काराये भगति से जियराइ जुड़ाये हो

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॥ पावन पाठ ॥

मन मुश्काराये भगति से जियराइ जुड़ाये हो,

ये चित्रगुप्त महाराज के दर पे शीश निभाये हो,

मन मुश्काराये भगति से जियराइ जुड़ाये हो,

चित्रगुप्त महाराज की भगति जे करे श्रद्धा भाव से,

भटक सके न न्यू कर जिंदगी कब नूरे भटकाव से,

विद्या बुद्धि के सागर सेवक बन जाए हो,

मन मुश्काराये भगति से जियराइ जुड़ाये हो,

विनय बिहारी अनुजा नारी पा गई पा वरदान हो,

चित्रगुप्त महाराज की महिमा बड़ी जग में महान हो,

भाग्ये की रेखा चमकी कीर्ति लहराई हो,

मन मुश्काराये भगति से जियराइ जुड़ाये हो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।