मैं हर जन्म तेरी बेहना बनु

पारंपरिक
माँ गंगा भजन विविध भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

मैं हर जन्म तेरी बेहना बनु तू हर जन्म मेरा बहियाँ बने,

इक जन्म क्या सातो जन्म तेरा ही छाया सिर पे रहे,

रिश्ते नाते बहुत है जग में कोई न रिश्ता ऐसा,

भाई बहिन का प्यार है पावन गंगा जल के जैसा,

मैं उस घर की करू हिफ़ायत तू जिस घर का गेहना बने,

मैं हर जन्म तेरी बेहना बनु तू हर जन्म मेरा बहियाँ बने,

देश रहे पर प्रदेश रहे हम बदले गे न इरादे,

राखी के धागो में छुपे है प्यार भरे कुछ वादे,

बुरी नजर कोई छू न पाए तू मेरा लाज रखईयाँ बने,

मैं हर जन्म तेरी बेहना बनु तू हर जन्म मेरा बहियाँ बने,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।