तेरे दर उते आके शेरावालिये दिल जान नु नहीं करदा

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दिल करे तेरा मैं दीदार रहा करदा,

तेरे सोहने मंदिरा नु प्यार रहा करदा,

तेरी रेहमत सदका दातिए मीह खुशियां दा वंड दा,

तेरे दर उते आके शेरावालिये दिल जान नु नहीं करदा

मुख तेरे दा नूर दातिए करदा दूर हनेरे,

सारे ही माँ दुःख मूक जांदे दर्शन करके तेरे,

हूँ किसे भी गल तो दाती मेरा दिल नहीं डर दा,

तेरे दर उते आके शेरावालिये दिल जान नु नहीं करदा

चन तेरे मथे दा टिका कनकलांदे झुमके,

दर तेरे जही ख़ुशी मिली न मैं देख लिया जग घूम के,

नच नच दर उते खुशियां मनावा मेरा इहो दिल करदा,

तेरे दर उते आके शेरावालिये दिल जान नु नहीं करदा

कहे अमन गुरदासपुरी तेरी ऐसी रेहमत होइ,

खुशियां दे नाल भर गए बेहड़े दुःख न बचैया कोई,

तेरी रेहमत लिख्दा है सब कुछ तेरे वल दा.

तेरे दर उते आके शेरावालिये दिल जान नु नहीं करदा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।