शिरडी में रेहमतो की बरसात हो रही है

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॥ पावन पाठ ॥

शिरडी में रेहमतो की बरसात हो रही है ,

रेहमत स्वालियो पर दिन रात हो रही है,

खाली कोई सवाली लौटा नहीं याहा से,

सब को मिली मुरदे बाबा के आसता,

हिन्दू की भी है चिंता मुस्लिम की भी फ़िक्र है,

क्या चाहिये किसे ये बाबा को सब खबर है,

जो बात जिसने सोची वो बात हो रही है,

शिरडी में रेहमतो की बरसात हो रही है

बड़ा खुश नसीब है वो शिरडी जो आ गया है,

बाबा के समाने जो आंसू व हां गया है,

उसकी मुशीबतो को साई ने पल में टाला,

जो शान से है कहता मेरा रब है शिरडी वाला,

मंजूर उसकी सारी फर्याद हो रही है,

शिरडी में रेहमतो की बरसात हो रही है

इस बात की गवाही यु दे रहा सनी है,

संब्ला यही मुकदर बिगड़ी यही बनी है,

चरणों में साई जी के पौंछा है फूल मेरा,

बाबा ने कर लिया है सजदा कबुल मेरा,

साई जी सब दुआए मेरे साथ हो रही है,

शिरडी में रेहमतो की बरसात हो रही है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।