साई दा मेनू चढ़ गया रंग

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॥ पावन पाठ ॥

साई दा मेनू चढ़ गया रंग,

साईं दामैं मस्त मलंग साईं दा मैं मस्त मलंग,

साई दा मेनू चढ़ गया रंग

ईहो जेहा रंग मेरे साईं फ़कीर दा,

खुल जावे बुहा मेरी सोई तकदीर दा,

साई दा मेनू चढ़ गया रंग

साईं दे रंग विच जो भी रंगेया,

ओहदे दिल विच साईं है व्सेया,

साई दा मेनू चढ़ गया रंग

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।