सदा तेरे संग रहना चाहु मैं

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॥ पावन पाठ ॥

साई तुझे दिल की सुनाऊ मैं सदा तेरा दास कहाऊ मैं,

सदा तेरे संग रहना चाहु मैं,

तेरे बिन चैन न पाउ मैं कैसे इस दिल को समजाऊ मैं,

सदा तेरे संग रहना चाहु मैं,

साई मुझे चरणों की धूल बना चाहे मुझे प्यारा कोई फूल बना,

कभी तेरी गोद में आ जाऊ कभी दू मैं बाबा तेरी पालकी सजा,

माला बन गले लग जाऊ मैं सदा तेरे संग रहना चाहु मैं,

साई कैसे प्यार तेरा पाउ मैं,

कैसे तुझे अपना बनाऊ मैं,

सदा तेरे संग रहना चाहु मैं,

दिल करे लकड़ी मैं बन जाऊ,

बन पादुका चरणों में आउ,

द्वारका माई में जाकर मैं तेरे हाथो ही मुक्ति पाउ,

उदी बनु सब के काम आउ मैं,

सदा तेरे संग रहना चाहु मैं,

बाती दीपक की बना दे मुझे शिरडी में अपनी सजा दे मुझे,

बत्रा भी बन जाए नौकर तेरा करू क्या साई ये समजा दे मुझे,

तुझपे ही वारि वारि जाऊ मैं,

सदा तेरे संग रहना चाहु मैं,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।