मैं तो गोवेर्धन को जाऊ मेरी वीर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैं तो गोवर्धन कूँ जाऊं मेरे वीर,

नाही माने मेरो मनवा,

मैं तो गोवर्धन कूँ जाऊं मेरे वीर,

सात कोस की है परिकम्मा,

मैं तो मानसी गंगा नहाऊं मेरे वीर

नाही माने मेरो मनवा,

मैं तो गोवर्धन कूँ जाऊं मेरे वीर,

सात सेर की करी रे करियां

मैं तो संतन न्यौंत जिमाऊं मेरे वीर

नाही माने मेरो मनवा,

मैं तो गोवर्धन कूँ जाऊं मेरे वीर,

चन्द्रसखी भज बालकृष्ण छवि,

मैं तो हरि दर्शन को पाऊँ मेरे वीर,

नाही माने मेरो मनवा,

मैं तो गोवर्धन कूँ जाऊं मेरे वीर,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।