रज रज करिये दीदार माँ चिंतपूर्णी दे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हथा विच झंडे फड़ किने सोहने जचदे,

मैया दे भगत आज नच्दे न थक दे,

मेला लगाया है विच दरबार माँ चिंतपूर्णी दे ,

रज रज करिये दीदार माँ चिंतपूर्णी दे

दुरो दुरो चल के द्वारे वेखो माँ दे अज ाइयाँ संगता,

नारियल भेटा चुनी दर ते चढ़ाऊँ ले ाइयाँ संगता,

हुंडी हर पास जय जय कार माँ चिंतपूर्णी दे,

रज रज करिये दीदार माँ चिंतपूर्णी दे

बसा ते टरका कई साइकल ते आउंदे ने चढ़ाइयाँ चढ़ के,

भगा वाले हुन्दे ने जेहड़े चरना च बैठ हाजरी भर दे,

सोहने उचे उचे लगदे पहाड़ माँ चिंता पुरनी दे,

रज रज करिये दीदार माँ चिंतपूर्णी दे

कुलियाँ दा कहंदा बलवीर माँ ने सिर उते हठ धरेया,

हर वेले एह रेह्न्दा रंगीले नु भी सरूर चड़ेया,

ओहदे रेहमता दे खुले ने भंडार माँ चिंतपूर्णी दे ,

रज रज करिये दीदार माँ चिंतपूर्णी दे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।