हे शिवशंकर नटराजा

अनूप जलोटा
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हे शिवशंकर नटराजा,

मैं तो जनम जनम का दास तेरा ।

निसदिन करता मैं नाम जपन तेरा,

शिव शिव शिव शिव गुंजत मन मोरा ।

तुम हो मरे प्रभु, तुम ही कृपालु,

करूँ समर्पण दीन दयालु ॥

तोरी जटा से बहती पवित्रता,

तीन्ही लोको के तुम हो दाता ।

डमरू बजाया, तमस भगाया,

जड़ चेतन को तुम्ही ने जगाया ॥

अलख निरंजन शिव मोरे स्वामी,

तुम ही हो मेरे अंतरयामी ।

भूल जो कोई हुई है मुझ से,

क्षमा मैं मांगू हर पल तुझ से ॥

लीला से तेरी डोले यह धरती,

करे जो भक्ति देता तू मुक्ति ।

तांडव नृत्य प्रलय करा के,

भव सागर तू पर करादे ॥

छवि तेरी है सब से सुन्दर,

शशि विराजे तेरी जटा में ।

हार मणि का शोभे गले में

चमके जैसे तारे गगन में ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।