मैं क्या जानू भक्ति क्या है मैंने तो प्रेम किया है

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॥ पावन पाठ ॥

मैं क्या जानू भक्ति क्या है मैंने तो प्रेम किया है,

आओ साई मैंने तुमको दिल से याद किया है,

आओ ना तुम काहे को देर लगाई ,

तेरे भक्त हजारो लाखो मैं ना जानू पूजा,

किसको पुजू तेरे बिन आये नजर न दूजा,

तेरे प्रेम में सुबहो शाम धड़के मेरा जिया है,

आओ साई मैंने तुमको दिल से याद किया है,

आओ ना तुम काहे को देर लगाई ,

तेरे चरणों में संगम है क्यों मैं तीर्थ है जाऊ,

बस जाओ मेरे हिरदये में जब चाहु तब पाउ,

मेरी सांसो की सारंगी करती पिया पिया है,

आओ साई मैंने तुमको दिल से याद किया है,

आओ ना तुम काहे को देर लगाई ,

बुजा हुआ है दीपक मेरा साई आन जगाओ,

पल पल मरता मौत नई नित,

मुझको आन जिआओ,

अपने अश्को से हरष तेरा अभिषेक किया है,

आओ साई मैंने तुमको दिल से याद किया है,

आओ ना तुम काहे को देर लगाई ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।