सँवारे ने साथ निभाया है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जब कोई न था हमारा और पास नहीं था किनारा,

जब हार गया इस जग से बाबा ने दियां सहारा,

सँवारे ने साथ निभाया है,रोते को हस्या है

बचपन से ही हमने तो भजनो से प्यार किया है,

विपदा कितनी आ जाये तेरा ही नाम लिया है,

मैंने तुमसे आस लगाई और तुमने की सुनवाई,

दुनिया ने हाथ छुड़ाया पर तुमने राह दिखाई,

सँवारे ने साथ निभाया है,रोते को हस्या है

तूफ़ान अगर न आता मेरा श्याम नजर ना आता,

इन संकट के आने से मैं तुमको समज न पाता,

हारे का तू ही सहारा दुखियो का पालनहारा,

सुख दुःख के पलो में बाबा बस याद रहे जैकारा,

सँवारे ने साथ निभाया है,रोते को हस्या है

पालनपिता के जैसा करता माँ सा करे दुलार,

खुशियों से जिंदगानी तुमने भर दी दातार,

कोमल का यही है कहना पल पल तू संग में रहना,

अब तक है साथ निभाया आगे भी निभाते रहना,

सँवारे ने साथ निभाया है,रोते को हस्या है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।