मंगल मूरति मारुतनंदन जय हनुमान

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

मनोजवम मारुत तुल्य वेगम, जितेंद्रियम बुद्धिमतां वरिष्ठं

वातात्मजं वानारायूथ मुख्यम, श्रीराम दूतं शरणम प्रपद्धे ||

मंगल मूरति, मारुतनंदन, भक्तविभूषण जय हनुमान

सकल अमंगल, मूल निकंदन, संकट मोचन जय हनुमान ||

(जय हनुमान - जय हनुमान ) - २

(जय हनुमान -जय हनुमान, जय हनुमान -जय हनुमान) - २

पवन तनय संतन हितकारी, ह्रदय बिराजत अवधविहारी

राम लखन सीता श्री चरण में, भक्तविभूषण जय हनुमान ||

जय हनुमान ...

मातुपिता, गुरु, गनपति, सारद, सिवा समेत संभु सुख नारद

राम लखन सीता श्री चरण में, भक्तविभूषण जय हनुमान ||

जय हनुमान ...

चरन बंदी बिनबौ सब काहूँ, देहु रामपद नेह निबाहूं

राम लखन सीता श्री चरण में, भक्तविभूषण जय हनुमान ||

जय हनुमान ...

बंदौ राम लखन बैदेही, जे तुलसी के परम सनेही

राम लखन सीता श्री चरण में, भक्तविभूषण जय हनुमान ||

जय हनुमान ...

गीत : संत तुलसी दास

संगीत : अरुण सराफ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।