सांवरिया ने मोहे अपने रंग रंगलीनी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सांवरिया ने मोहे अपने रंग रंगली नि,

मुरली की मीठी तान सुना के,

अपने वस मोहे की नि

सांवरिया ने मोहे अपने रंग रंगली नि,

व्याकुल व्याकुल अब रहती मैं,

पीड़ा विरहा की अब सेहती मैं,

रात रात मैं जागु मैं तो,निंद्रा मोहि छीनी

सांवरिया ने मोहे अपने रंग रंगली नि,

कैसा मुझको रोग लगाया,

खुशबु बन सांसो में समाया,

कशु न दिखे कशु ना ही सूजे,

वैरागन कर दीनी,

सांवरिया ने मोहे अपने रंग रंगली नि,

मनवा कहे न अब है लागे याद में इसकी यादो में जागे,

कौन सुने अब का को सुनाऊ प्रीत मो को भी ही नी,

सांवरिया ने मोहे अपने रंग रंगली नि,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।