महफिल रूहा दी मेरे सतगुरु लाई है

अलका गोएल
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॥ पावन पाठ ॥

महफिल रूहा दी मेरे सतगुरु लाई है

जेह्डा आ वडया उह्नु मस्ती छाई है

आओ सईयो जी कुट पिके देखो जी

पहले पिके ते फिर जीके देखो जी

जेह्डा पी लेनदा उसने होश गवाई है

जेह्डा........

लोहा पारस सोहना बन जानदा है

मेरा सतगुरु अपने जेहा बनान्दा है

युती दे नाल सतगुरु कुट पीलाई है

जेह्डा........

जेह्डा पी लेनदा उसदी दशा अनोखी है

लेकिन सईयो नी एह पौडी ओखी है

जेह्डा पी लेनदा करम कमाई है

जेह्डा........

सतगुरु मेरे ने जेह्डे भर भर देन्दे ने

दुनिया मतलब दी जो कुछ ना देन्दी है

आशिक प्रेमी ने इक विक लगाई है

जेह्डा........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।