दाती के दर पे बन जोगणियां नाच रहे छम छम

पारंपरिक
श्री गणेश भजन दुर्गा भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

दाती के दर पे बन जोगणियां नाच रहे छम छम,

नाच रहे छम छम नाच रहे छम छम,

ढोल नगाड़े ताशे भाजे भूत प्रेत संग भोला नाचे,

डम डम डमरू भाजे भोले जी है संग,

दाती के दर पे बन जोगणियां नाच रहे छम छम,

बह्रमा नाचे विष्णु नाचे नारद शारद बीन भजावे ,

देखो देखो इन्दर जी आये हर दम रहे मगन,

दाती के दर पे बन जोगणियां नाच रहे छम छम,

मैया जी का सिंह भी नाचे कार्तिक जी का मोर भी नाचे,

देख गणेश का मुश् भी नाचे होक मगन,

दाती के दर पे बन जोगणियां नाच रहे छम छम,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।