शंकर चौरा रे महामाई कर रही

पारंपरिक
श्री राम भजन दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

शंकर चौरा रे महामाई कर रही सोल्हा रे शृंगार माई कर रही सोल्हा रे,

शंकर चौरा रे महामाई कर रही सोल्हा रे

माथे उनके बिंदिया सोहे टिलकी की बलिहारी राम,

सिंदूर लगा रही रे मांग में सिंधुर लगा रही रे,

शृंगार माई कर रही सोल्हा रे

कान में उनके कुण्डल सोहे नथुनी की बलिहारी राम,

हरवा पहन रही रे गले में हरवा पहन रही रे,

शृंगार माई कर रही सोल्हा रे

हाथो उनके कंगना सोहे चूड़ी की बलहारी राम,

मुंदरी पहन रही रे हाथ में मुंदरी पहन रही रे,

शृंगार माई कर रही सोल्हा रे

कमर उनके गरदन सोहे झूलो की बलिहारी राम,

कुछ न पहन रही रे कमर में कुछ न पहन रही रे,

शृंगार माई कर रही सोल्हा रे

पाओ में उनके पायल सोहे विछियां की बलिहारी राम,

महावर लगा रही रे पाओ में महावर लगा रही रे

शृंगार माई कर रही सोल्हा रे

अंग में उनके चोला सोहे गगरा के बलिहारी राम,

चुनरी ओड रही रे चुनरी ओड रही रे,

शृंगार माई कर रही सोल्हा रे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।