देवर यु बन गये शत्रु घन लखन भरत तीनो भाई

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सीता जी के भाग जगे श्री राम ने माला पहनाई,

देवर यु बन गये शत्रु घन लखन भरत तीनो भाई,

सास मिली कौशलया जैसी माँ जैसा प्यार दियां,

ससुर मिले दशरत जी ऐसे पिता के सब अधिकार दियां,

राजा जनक की देहडी छोड़ी रघुवर रानी कहलाई,

देवर यु बन गये शत्रु घन लखन भरत तीनो भाई,

केकाई और सुमित्रा जी के पाँव छुए आशीष लिया,

जनक दुलारी ने ऋषि मुनि गुरुओ को बी समान दियां,

सजा अयोध्या धाम निराला,

घर घर में खुशियां छाई,

देवर यु बन गये शत्रु घन लखन भरत तीनो भाई,

गंगा कलश द्वार पे छिड़के होये दुल्हन की आरती ,

सीता राम का विवाह देख कर धन्य हुए सब भारती,

मंगल भवन अमंगल हारी गीत सुनाये शहनाई,

देवर यु बन गये शत्रु घन लखन भरत तीनो भाई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।