ओ मईया तैने का ठानी मन में

रविंद्र जैन
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

ओ मईया तैने का ठानी मन में,

राम-सिया भेज दइ री वन में -२

हाय री तैने का ठानी मन में,

राम-सिया भेज दइ री वन में -२

यधपि भरत तेरो ही जायो,

तेरी करनी देख लज्जायो,

अपनों पद तैने आप गँवायो

भरत की नजरन में,

राम-सिया भेज दइ री वन में ,

हठीली तैने का ठानी मन में,

राम-सिया भेज दइ री वन में |

महल छोड़ वहाँ नहीं’ रे मड़ैया,

सिया सुकुमारी,संग दोउ भईया,

काहू वृक्ष तर भीजत होंगे,

तीरो मेहन में,

राम-सिया भेज दइ री वन में ,

दीवानी तैने का ठानी मन में,

राम-सिया भेज दइ री वन में -२

कौशल्या की छिन गयी वाणी,

रोय ना सकी उर्मिला दीवानी,

कैकेयी तू बस एक ही रानी

रह गयी महलन में,

राम-सिया भेज दइ री वन में ,

दीवानी तैने का ठानी मन में,

राम-सिया भेज दइ री वन में -२

स्वर - रविन्द्र जैन

म्यूजिक - रविंद्र जैन

गीतकार - रविंद्र जैन

This Bhajan Is Taken From Ramayana Serial (1987).

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।