धन्य धन्य मेरे साई जी धन्य तेरे उपकार ने

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॥ पावन पाठ ॥

धन्य धन्य मेरे साई जी धन्य तेरे उपकार ने ,

सेवका दे नाल तेरे गुडे गुडे प्यार ने,

सूंदर रूप अनूप तेरा झिलमिल नजारा है,

लैके तेरा नाम तर गये काइयाँ ने तर जाना है,

भेद तेरा है बाबा मेरे बड़े अपरम्पार ने,

सेवका दे नाल तेरे गुडे गुडे प्यार ने,

पूजे तेनु शृष्टि सारी देव महिमा गांदे,

ऋषि मुनि और जोगी सारे दर्शन तेरे चावदे,

जो कोई आवे सो फल पावे भरे तेरे भण्डार ने,

सेवका दे नाल तेरे गुडे गुडे प्यार ने,

तूने जग का खेल रचाया साई शिरडी वालेया,

रोम रोम विच तू है समाया मेरा बाबा प्यारेया,

भक्त है आये दर्शन तेरे चल तेरा दरबार में,

सेवका दे नाल तेरे गुडे गुडे प्यार ने,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।