जोगिया दर्शन तेरे करके

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॥ पावन पाठ ॥

असी धन धन हो गये जी,

जोगिया दर्शन तेरे करके

तू मोर सवारी करदा ऐ,

सबना दियां झोलियाँ बरदा ऐ,

जावांगे दर्शन करके,

असी धन धन हो गये जी,

तेरा दर ते आये सवाली जी,

मोडी न दर तो खाली जी,

डरदे आ अरजा करके,

असी धन धन हो गये जी,

तेरे दर दी ओट तका लई ऐ,

तेरा नाम दी माला पा लई ऐ,

आये उचियाँ च्दाईयाँ चडके,

असी धन धन हो गये जी,

ਅਸੀਂ ਧੰਨ ਧੰਨ, ਹੋ ਗਏ ਜੀ,

ਜੋਗੀਆ, ਦਰਸ਼ਨ ਤੇਰੇ ਕਰਕੇ xll-ll

ਤੂੰ ਮੋਰ ਸਵਾਰੀ, ਕਰਦਾ ਏ,

"ਸਭਨਾਂ ਦੀਆਂ ਝੋਲੀਆਂ, ਭਰਦਾ ਏ" ll,,

ਜਾਵਾਂਗੇ, ਦਰਸ਼ਨ ਕਰਕੇ,

ਅਸੀਂ ਧੰਨ ਧੰਨ,,,,,,,,,,,

ਤੇਰਾ ਦਰ ਤੇ ਆਏ, ਸਵਾਲੀ ਜੀ,

"ਮੋੜੀ ਨਾ, ਦਰ ਤੋਂ ਖਾਲੀ ਜੀ" ll,,

ਡਰਦੇ ਆਂ, ਅਰਜ਼ਾਂ ਕਰਕੇ,

ਅਸੀਂ ਧੰਨ ਧੰਨ,,,,,,,,,,,

ਤੇਰੇ ਦਰ ਦੀ ਓਟ, ਤਕਾ ਲਈ ਏ,

"ਤੇਰੇ ਨਾਮ ਦੀ ਮਾਲਾ, ਪਾ ਲਈ ਏ" ll,,

ਆਏ ਉੱਚੀਆਂ, ਚੜ੍ਹਾਈਆਂ ਚੜ੍ਹਕੇ,

ਅਸੀਂ ਧੰਨ ਧੰਨ,,,,,,,,,,,

ਅਪਲੋਡਰ- ਅਨਿਲਰਾਮੂਰਤੀਭੋਪਾਲ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।