माहरे सिर पे है मैया जी को हाथ

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॥ पावन पाठ ॥

माहरे सिर पे है मैया जी को हाथ कोई तो मारो ताहि कर सी,

जे कोई माहरी मैया जी ने सांचे मन से ध्यावे,

काल कपाल भी मैया जी के भगता से गबरावे,

जे कोई पकड़ो है मैया जी रो हाथ विको तो मैया काई कर सी,

माहरे सिर पे है मैया जी को हाथ कोई तो मारो ताहि कर सी,

जो माँ पे विश्वाश करे वो घुटी तान के सोहे,

पथ न वेस करे कोई बाल न बांको हॉवे,

जानके मन में नहीं है विश्वाश विको तो मैया कोई कर सी,

माहरे सिर पे है मैया जी को हाथ कोई तो मारो ताहि कर सी,

कलयुग माहि ताहियाँ मियां महारी साँची नाम कमाई,

जब जब भीड़ पड़ी भगता पे दौड़ी दौड़ी आई,

या तो घट घट की जाने सारी बात कोई तो माहरो ताहि कर सी

माहरे सिर पे है मैया जी को हाथ कोई तो मारो ताहि कर सी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।