हिमाद्रि तुंग श्रृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती

पारंपरिक
अन्य भजन देश भक्ति भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

हिमाद्रि तुंग श्रृंग से

प्रबुद्ध शुद्ध भारती ---

स्वयं प्रभा समुज्ज्वला

स्वतंत्रता पुकारती ---

अमर्त्य वीरपुत्र हो, दृढ प्रतिज्ञ सोच लो,

प्रशस्त पुण्य पंथ है --- बढे चलो,बढे चलो ||

असंख्य कीर्ति-रश्मियाँ ,

विकीर्ण दिव्य दाह-सी |

सपूत मातृभूमि के ---

रुको न शूर साहसी |

अराति सैन्य सिंधु में,सुवाड़वाग्नि-से जलो,

प्रवीर हो जयी बनो -- बढे चलो, बढे चलो !

गायिका - माधुरी मिश्रा

रचयिता - जय शंकर प्रसाद

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।