श्री सरस्वती वंदना

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हे स्वर की देवी मां, वाणी में मधुरता दो,

हे स्वर की देवी मां, वाणी में मधुरता दो,

मैं गीत सुनाता हूं संगीत की शिक्षा दो,

मैं गीत सुनाता हूं संगीत की शिक्षा दो,

अज्ञान गृहीत होकर क्या गीत सुनाऊं मैं,

टूटे हुए शब्दों से क्या स्वर को सजाऊं मैं,

अज्ञान गृहीत होकर क्या गीत सुनाऊं मैं,

टूटे हुए शब्दों से क्या सर को सजाऊं मैं

तुम ज्ञान का सुख बहार मां मुझ पर दया कर दो,

तुम ज्ञान का सुख बहार मां मुझ पर दया कर दो,

मैं गीत सुनाता हूं संगीत की शिक्षा दो,

है स्वर की देवी मां वाणी में मधुरता दो..........

सरगम का ज्ञान नहीं ना लय का ठिकाना है,

मुझे आज सभा में मां तेरा गीत सुनाना है,

सरगम का ज्ञान नहीं ना लय का ठिकाना है,

मुझे आज सभा में मां तेरा गीत सुनाना है,

तुम गीत समंदर से, एक गीत मुझे दे दो,

तुम गीत समंदर से, संगीत समंदर से, एक गीत मुझे दे दो,

मैं गीत सुनाता हूं संगीत की शिक्षा दो

मैं गीत सुनाता हूं संगीत की शिक्षा दो..

है स्वर की देवी मां वाणी में मधुरता दे.

बस नाम है तेरा मां पर मुझ में कुछ भी नहीं,

तुझे आज सुनाने को मेरी मैया विनती सही,

बस नाम है तेरा मां पर मुझ में कुछ भी नहीं,

तुझे आज सुनाने को मेरी मैया विनती सही,

तुम कोटि खजाने से, संगीत खजाने से एक गीत की शिक्षा दो,

तुम कोटि खजाने से, संगीत खजाने से एक गीत की शिक्षा दो,

मैं गीत सुनाता हूं संगीत की शिक्षा दो

मैं गीत सुनाता हूं संगीत की शिक्षा दो,

है स्वर की देवी मां वाणी में मधुरता दो,

है स्वर की देवी मां वाणी में मधुरता दो,

मैं गीत सुनाता हूं संगीत की शिक्षा दो,

मैं गीत सुनाता हूं संगीत की शिक्षा दो,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।