साणु आना ही पिया फिर माइये तेरा सुनेहा जो आगिया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

साणु आना ही पिया फिर माइये तेरा सुनेहा जो आगिया

इस सुनहे तो वारी वारी जाइये तेरा सुनेहा जो आगिया

सुते जागे भाग जागी सूती तक़दीर,

माँ पल विच फेर दिति मथे दी लकीर माँ,

अस्सी क्यों न ख़ुशी मनाइये,

आपे तू बुलाया मैया आपे खेरा पाएगी,

आप कोल बैठ साणु दर्श दिखाएगी,

असि सिर न अपने झुकाइये,

इक गल मैया अज हो गई आ साफ़ ऐ,

लालां न सुनहे दाती भेजदी तू आप ऐ

तेरी मर्जी बिना किंज आइये

रात मेरे सपने च आयी तू भवानी माँ,

आया सी बुलावा ताहिंयो आये महारानी माँ

मधुर बंसी नू नाल लियाये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।