गुरूवर टेकचंद जी जैसा जग में सेठ कोई नी

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॥ पावन पाठ ॥

गुरुवर टेकचंद जी जैसा जग में सेठ कोई नी,

कड़छा धाम पे आई ने खाली जावे कोई नी,

यहां आई ने भक्ता की खाली मौज होए नी,

कड़छा धाम पे आई ने खाली जावे कोई नी,

गुरूवर तो आज म्हारा सेठ बन्या है,

कड़छा का मंदिर टेकचंद जी बैठ्या है,

आज माँग लो सब थे तो मन चाहो जोई भी,

कड़छा धाम पे...

भगत रंग्या भगवान रंग्या है,

भक्ता का मन में गुरुदेव बस्या है,

नवयुवक संग में आज सबकी मौज होए नी,

कड़छा धाम पे..

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।