गुरु ज्ञान की हो बरसात आप के वचनो से

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॥ पावन पाठ ॥

गुरु ज्ञान की हो बरसात आप के वचनो से,

अमृत बरसे दिन रात आप के वचनो से,

सत्ये का दर्पण दिखा दिया है नींद से मुझे जगा के ,

हे आचार मेरी आँखों में देखा जब मुसका के ,

मैं समज गया हर बात आप के वचनो से,

गुरु ज्ञान की हो बरसात आप के वचनो से,

सच कहता हु आप से नाता जोड़ा मैंने जब से ,

लोभ मोह छल कपट वासना पास ना आये तब से,

हो शुरू मेरी परभात आप के वचनो से,

गुरु ज्ञान की हो बरसात आप के वचनो से,

बून्द था मैं पानी की आप ने सागर बना दियां,

खाली मन को ज्ञान का गुरु वर गागर बना दियां,

मिलता है प्रभु का साथ आप के वचनो से,

गुरु ज्ञान की हो बरसात आप के वचनो से,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।