अब कर दो नाम दीवाना

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॥ पावन पाठ ॥

कर दो नाम दीवाना जी, अब कर दो नाम दीवाना,

मैं ताकू शब्द निशाना, मैं ताकू शब्द निशाना ।

मांगू एक गुरु से दाना,

घट शब्द देयो पहचाना,

घट शब्द देयो पहचाना जी,अब कर दो नाम दीवाना ।

मन साथ सदा परवाना,

कर किरपा करम छड़ना ,

कर किरपा करम छड़ना जी,अब कर दो नाम दीवाना ।

सूरत चढ़े सुने धुन ताना,

मन मारो करो निशाना,

मन मारो करम निशाना जी,अब कर दो नाम दीवाना,

सब छूटे बाण कमाना,

सत-शब्द मिले ढृढ़ ताना,

सत-शब्द मिले ढृढ़ ताना जी,अब कर दो नाम दीवाना,

कोई करे ना मेरी हाना,

मोहे तुम पर बल-बल जाना,

मोहे तुम पर बल-बल जाना जी,अब कर दो नाम दीवाना ।

कल धारा मुझे ना बहाना,

मुझे देना शब्द ठिकाना,

मुझे देना शब्द ठिकाना जी,अब कर दो नाम दीवाना ।

मन हो गया बोहोत निमाणा,

अब राधास्वामी चरण समाना,

अब राधास्वामी चरण समाना जी,अब कर दो नाम दीवाना ।

कर दो नाम दीवाना जी,अब कर दो नाम दीवाना,

मैं ताकू शब्द निशाना,मैं ताकू शब्द निशाना ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।