कन्हियाँ आजा घडी दो घड़ी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मैंने कुटिया आज सजाई आजा आजा कृष्ण कन्हाई,

तेरे दर्शन की प्यास जगे कन्हियाँ आजा घडी दो घड़ी,

मैंने कुटिया आज सजाई आजा आजा कृष्ण कन्हाई,

भाग जो कर तू आये तेरी धूलि मिल जाये बंद किस्मत खुल जाये सांवरिया हो,

मेरी बिगड़ी बात बना दी मुझको इक झलक दिखला दी,

अँखियाँ रस्ते पर कब लगी,कन्हियाँ आजा घडी दो घड़ी,

मेरे दिलदार सांवरियां छोड़ के खाटू नगरियां,

ले ले टाबर की खबरियाँ ओ बाबा आ,

आजा रुखा सूखा खाने इस निर्धन का मान बढ़ाने,

थाली छप्पन भोग से सजी,कन्हियाँ आजा घडी दो घड़ी,

घर जो इक वारी आये ये गाबा जा न पाए,

प्रेम बंधन बन जाये सांवरिया आ,

सुन ले भरोसा तोड़ न देना रूभी रिधम को छोड़ न देना,

बहती असुवन की ये झड़ी कन्हियाँ आजा घडी दो घड़ी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।