क्यों पीवे तू पानी हंसिनी

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॥ पावन पाठ ॥

क्यों पीवे तू पानी हंसिनी,क्यों पीवे तू पानी,

सागर खीर भरा घट भीतर,

पीयो सूरत तानी हंसिनी,

क्यों पीवे तू पानी ।

जग को जार धसो नभ अंदर,

मंदर परख निशानी हंसिनी,

क्यों पीवे तू पानी ।

गुर मूरत तू धार हिये में,

मन के संग क्यों फिरत निमाणी हंसिनी,

क्यों पीवे तू पानी ।

तेरा काज करे गुर पूरे,

सुन ले अनहद वाणी हंसिनी,

क्यों पीवे तू पानी ।

करम भरम बस सब जग बौरा,

तू क्यों होत दीवानी हंसिनी,

क्यों पीवे तू पानी ।

सूरत सम्भार करो सत-संगत,

क्यों बिख अमृत सानी हंसिनी,

क्यों पीवे तू पानी ।

तेरा धाम अधर में प्यारे,

क्यों धर संग बंधाणी हंसिनी,

क्यों पीवे तू पानी ।

जल्दी करो चढ़ो ऊंचे को,

राधास्वामी कहत बखानी हंसिनी,

क्यों पीवे तू पानी ।

क्यों पीवे तू पानी हंसिनी,क्यों पीवे तू पानी ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।