सूर्य से जिसने तेज है पाया

पारंपरिक
महादेव भजन शनि देव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

माँ छाया से दया मिली है,

सूर्ये से जिसने तेज है पाया,

शिव की तपस्या कर के शनि ने,

अतः शक्ति का वर है पाया,

माँ छाया से दया मिली है,

सूर्ये से जिसने तेज है पाया,

किरपा ये अपनी जिस पे करदे उसके ये खली भंडारे भर दे,

तेज से मिट जाए अंधियारे,

काल दोष सब इनसे है हारे,

मंगल ही मंगल करते है विपता को हरने वाले,

रोता हुआ जो धाम में आया खुशिया पाई और मुस्कुराया,

माँ छाया से दया मिली है,

सूर्ये से जिसने तेज है पाया,

जिसने जपा है नाम शनि का बुरे समय में श्रदा भाव के साथ हो,

उसको दियां है शनि देव ने हर मुश्किल हर विपदा में साथ,

दुखियो दीनो और अनाथो के बन के आये भगवन नाथ,

भाइयाँ साढ़े साती कटी है जिस ने शनि का धान लगाया ,

माँ छाया से दया मिली है,

सूर्ये से जिसने तेज है पाया,

क्यों डरता है क्यों तू गबराये शनि भगवान है तेरे सहाये,

अपना अर्पण कर दे तू इनको वधाओ से मुक्ति मिल जाए.

तेरे दुखो को दूर करे गे सुख से भरपूर करेंगे,

ॐ श शनिशराये जपा है उसने मन वांछित फल पाया,

माँ छाया से दया मिली है,

सूर्ये से जिसने तेज है पाया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।