मोहे तो प्यारी लागे बरसाने की गलियां

गोविन्द भार्गव
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मोहे तो प्यारी लागे बरसाने की गलियां

जग सो न्यारी हैं यह बरसाने की गलियां

रसिको की प्राण हैं यह, जीवन आधार हैं यह

राधे जु की किरपा का,

श्यामा जु की किरपा का द्वार हैं यह गलियां

मोहे तो प्यारी लागे...

बरसाने जो भी आवे, चरणों में प्रीत पावे

राधे जु की पायल की,

श्यामा जु की पायल जी झंकार हैं यह गलियां

मोहे तो प्यारी लागे...

दधिकांदो की और केसर की कीच मचे

प्रेस रास धारा की,

प्रेम रास धारा की बौछार हैं यह गलियां

मोहे तो प्यारी लागे...

राधे को नाम गावे, बंसी की तान गावे,

मीठी मीठी वीणा की,

मीठी मीठी वीणा की तान हैं यह गलियां

मोहे तो प्यारी लागे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।