असि मेहरा तेरियां उडीक दे ही रह

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे ही भरोसे मैं ता आज गया ठगेया,

आई न समज कुझ पता भी न लगेया,

रेहमता दे सागर तेरे खोरे किथे रह गये,

असि मेहरा तेरिया उडीक दे ही रह गये,

बड़ा दिल करे तेरा शुक्र मनाऊं नु,

तेरी मेहर तेरी मेहर रोला रोज पाऊं नु,

बन ने तो पेहला महल चावा वाले ढेह गये,

असि मेहरा तेरियां उडीक दे ही रह गये,

जैमता दा भार होर सेहा नहीं जांदा है,

मुकियाँ सबर हूँ रेहा नहीं जांदा है,

जीना चिर सेह होया ओहना चिर सेह गये,

असि मेहरा तेरियां उडीक दे ही रह गये,

सागर दे हाल उते गौर भी ना किता तू,

लारेया दे बिना कुझ होर भी न किता तू,

माफ़ करि फेर भी जी कोड़ा कुझ कह गये,

असि मेहरा तेरियां उडीक दे ही रह गये,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।